मुख्य विषयवस्तु में जाएं

हीमोग्लोबिन E ट्रेट (विशेषक)

हीमोग्लोबिन E ट्रेट (विशेषक) क्या है?

हीमोग्लोबिन E ट्रेट (विशेषक) एक ऐसी जीन में हुआ बदलाव (उत्परिवर्तन) है जो (…) को प्रभावित करती है। हीमोग्लोबिन में लाल रक्त कोशिकाएं। सभी लाल रक्त कोशिकाओं में हीमोग्लोबिन होता है। हीमोग्लोबिन एक प्रोटीन है जो ऑक्सीजन को फेफड़ों से शरीर के बाकी सभी भागों तक लेकर जाता है।

सामान्य हीमोग्लोबिन वाले लोगों में केवल एक प्रकार, हीमोग्लोबिन A, होता है। हीमोग्लोबिन E ट्रेट (विशेषक) से ग्रस्त लोगों की लाल रक्त कोशिकाओं में हीमोग्लोबिन A और हीमोग्लोबिन E होते हैं।

ट्रेट (विशेषक) और बीमारी में अंतर होता है

हीमोग्लोबिन E ट्रेट (विशेषक) से युक्त अधिकांश लोगों में बीमारी का कोई भी संकेत या लक्षण नहीं होता है। यह ट्रेट (विशेषक) सामान्यतः कोई भी स्वास्थ्य समस्याएँ नहीं करता है।

हीमोग्लोबिन E ट्रेट (विशेषक) से ग्रस्त लोगों में हीमोग्लोबिन E बीमारी या हीमोग्लोबिन E/बीटा थैलेसीमिया नहीं होता है। उनमें जीवन में आगे चलकर ये स्थितियाँ नहीं हो सकती हैं। लेकिन इन बीमारीों के जीन उनसे उनके बच्चों को मिल सकते हैं।

  • हीमोग्लोबिन E बीमारी एक वंशानुगत रक्त विकार है जिसके कारण व्यक्ति की लाल रक्त कोशिकाओं में अधिकांशतः हीमोग्लोबिन E होता है। बहुत अधिक हीमोग्लोबिन E होने से शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या और आकार में कमी आ सकती है जिससे हल्का एनीमिया हो सकता है। हीमोग्लोबिन E बीमारी सिकल सेल बीमारी का कोई प्रकार नहीं है और आम तौर पर इससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ नहीं होती हैं।
  • हीमोग्लोबिन E/बीटा थैलेसीमिया बीमारी एक वंशानुगत रक्त विकार है जिसके कारण आपके शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं और हीमोग्लोबिन का उत्पादन कम हो जाता है। यह एक आजीवन चलने वाली बीमारी है और यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ पैदा कर सकती है। इस बीमारी से ग्रस्त लोगों को चिकित्सीय उपचार की ज़रूरत होती है।
  • सिकल हीमोग्लोबिन E बीमारी (HbSE) एक प्रकार का सिकल सेल बीमारी है। इस स्थिति से ग्रस्त लोगों की लाल रक्त कोशिकाओं में हीमोग्लोबिन S और हीमोग्लोबिन E, दोनों होते हैं। कुछ स्थितियों में, इन लाल रक्त कोशिकाओं की आकृति सिकल (दराँती/हँसिया) या केले जैसी हो जाती है और वे चिपचिपी व कठोर हो जाती हैं। सिकल सेल साथ में जुड़कर गुच्छा बना लेती हैं और रक्त वाहिकाओं को बाधित कर सकती हैं। इसके कारण कोशिका क्षति और दर्द हो सकता है। सिकल हीमोग्लोबिन E बीमारी के लिए निरंतर चिकित्सीय देखभाल ज़रूरी होती है।

हीमोग्लोबिन E ट्रेट (विशेषक) के जोखिम कारक

हीमोग्लोबिन E ट्रेट (विशेषक) दुर्लभ है। यह उन लोगों में अधिक आम है जिनके पूर्वज दक्षिण-पूर्व एशिया, अफ़्रीका, भारत, मध्य-पू्व या भूमध्यसागरीय क्षेत्र से हैं। लेकिन किसी भी राष्ट्रीयता या वंशावली के व्यक्ति में हीमोग्लोबिन E ट्रेट (विशेषक) होना संभव है।

हीमोग्लोबिन E ट्रेट (विशेषक) के परीक्षण

एक रक्त परीक्षण आपको बता सकता है कि आपमें हीमोग्लोबिन E ट्रेट (विशेषक) है या नहीं। ये परीक्षण अक्सर नियमित नवजात स्क्रीनिंग के भाग के रूप में किए जाते हैं। यदि आपके परिवार में किसी को हीमोग्लोबिन E ट्रेट (विशेषक) है तो भी आपका चिकित्सक इस परीक्षण का सुझाव दे सकता है।

हीमोग्लोबिन E ट्रेट (विशेषक) वंशानुगत कैसे होता है 

हीमोग्लोबिन E ट्रेट (विशेषक) पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता है। आँखों के रंग या बालों के रंग की तरह, हीमोग्लोबिन E ट्रेट (विशेषक) के जीन भी वंशानुगत होते हैं, यानी माता-पिता से बच्चों को मिलते हैं।

हीमोग्लोबिन E ट्रेट (विशेषक) से ग्रस्त माता-पिता की संतान में हीमोग्लोबिन E बीमारी या हीमोग्लोबिन E/बीटा थैलेसीमिया हो सकता है। बच्चे को यह रक्त विकार है या नहीं यह बात माता और पिता, दोनों से प्राप्त जीन पर निर्भर करती है।

यदि माता या पिता में हीमोग्लोबिन E ट्रेट (विशेषक) है और पिता या माता में सामान्य हीमोग्लोबिन है

यदि माता या पिता में हीमोग्लोबिन E ट्रेट (विशेषक) है और पिता या माता में सामान्य हीमोग्लोबिन है तो:

हर गर्भावस्था के साथ, हीमोग्लोबिन E ट्रेट (विशेषक) से ग्रस्त संतान होने की 50% (2 में से 1) की संभावना होती है। 

हर गर्भावस्था के संभावित परिणाम इस प्रकार हैं:

  • हीमोग्लोबिन E ट्रेट (विशेषक) से ग्रस्त संतान होने की 50% (2 में से 1) की संभावना
  • इस ट्रेट (विशेषक) से मुक्त संतान होने की 50% (2 में से 1) की संभावना 
 
यदि माता या पिता में हीमोग्लोबिन E ट्रेट (विशेषक) है और पिता या माता में बीटा थैलेसीमिया ट्रेट (विशेषक) है

यदि माता या पिता में हीमोग्लोबिन E ट्रेट (विशेषक) है और पिता या माता में बीटा थैलेसीमिया ट्रेट (विशेषक) है तो:

हर गर्भावस्था के साथ, हीमोग्लोबिन E/बीटा थैलेसीमिया बीमारी, जो एक आजीवन चलने वाला रक्त विकार है जिसके लिए चिकित्सीय उपचार ज़रूरी होता है, से ग्रस्त संतान होने की 25% (4 में से 1) की संभावना होती है।

हर गर्भावस्था के संभावित परिणाम इस प्रकार हैं:

  • हीमोग्लोबिन E ट्रेट (विशेषक) से ग्रस्त संतान होने की 25% (4 में से 1) की संभावना
  • बीटा थैलेसीमिया ट्रेट (विशेषक) से ग्रस्त संतान होने की 25% (4 में से 1) की संभावना
  • हीमोग्लोबिन E/बीटा थैलेसीमिया बीमारी से ग्रस्त संतान होने की 25% (4 में से 1) की संभावना
  • इस ट्रेट (विशेषक) या बीमारी से मुक्त संतान होने की 25% (4 में से 1) संभावना
 
यदि माता और पिता, दोनों में हीमोग्लोबिन E ट्रेट (विशेषक) है

यदि माता और पिता, दोनों में हीमोग्लोबिन E ट्रेट (विशेषक) है तो:

हर गर्भावस्था के साथ, हीमोग्लोबिन E बीमारी से ग्रस्त संतान होने की 25% (4 में से 1) की संभावना होती है।

हर गर्भावस्था के संभावित परिणाम इस प्रकार हैं:

  • हीमोग्लोबिन E बीमारी से ग्रस्त संतान होने की 25% (4 में से 1) की संभावना
  • हीमोग्लोबिन E ट्रेट (विशेषक) से ग्रस्त संतान होने की 50% (2 में से 1) की संभावना
  • इस ट्रेट (विशेषक) या बीमारी से मुक्त संतान होने की 25% (4 में से 1) संभावना
 

ट्रेट (विशेषक) स्थितियों के बारे में और जानने के लिए अपने चिकित्सक या आनुवांशिक परामर्शदाता से बात करें। आपकी देखभाल टीम आपकी और आपके बच्चे की ट्रेट (विशेषक) स्थिति के बारे में आपको और विवरण दे सकती है।

हीमोग्लोबिन E ट्रेट (विशेषक) के बारे में मुख्य बिंदु

  • हीमोग्लोबिन E ट्रेट (विशेषक) वंशानुगत होता है, यानी माता-पिता से बच्चों को मिलता है, जैसे बालों या आँखों के रंग की तरह। 
  • हीमोग्लोबिन E ट्रेट (विशेषक) दक्षिण-पूर्व एशियाई वंशावली वाले लोगों में अधिक आम है।
  • हीमोग्लोबिन E ट्रेट (विशेषक) से ग्रस्त लोगों की लाल रक्त कोशिकाओं में सामान्य हीमोग्लोबिन A और असामान्य हीमोग्लोबिन E, दोनों होते हैं।
  • हीमोग्लोबिन E ट्रेट (विशेषक) से सामान्यतः कोई स्वास्थ्य समस्या नहीं होती है।
  • एक साधारण रक्त परीक्षण आपको बता सकता है कि आपमें हीमोग्लोबिन E ट्रेट (विशेषक) है या नहीं।
  • हीमोग्लोबिन E ट्रेट (विशेषक) से ग्रस्त माता-पिता की संतान में हीमोग्लोबिन E बीमारी, हीमोग्लोबिन E/बीटा थैलेसीमिया बीमारी या सिकल हीमोग्लोबिन E बीमारी हो सकता है।


समीक्षित: दिसंबर 2023

संबंधित सामग्री