हीमोग्लोबिन D ट्रेट (विशेषक) एक ऐसी जीन में हुआ बदलाव (उत्परिवर्तन) है जो (…) बनाने में मदद करती है। हीमोग्लोबिन में लाल रक्त कोशिकाएं। सभी लाल रक्त कोशिकाओं में हीमोग्लोबिन होता है। हीमोग्लोबिन एक प्रोटीन है जो ऑक्सीजन को फेफड़ों से शरीर के बाकी सभी भागों तक लेकर जाता है।
सामान्य हीमोग्लोबिन वाले लोगों में केवल एक ही प्रकार का हीमोग्लोबिन A होता है। हीमोग्लोबिन D ट्रेट (विशेषक) वाले लोगों की लाल रक्त कोशिकाओं में हीमोग्लोबिन A और हीमोग्लोबिन D दोनों होते हैं।
हीमोग्लोबिन D ट्रेट (विशेषक) से युक्त अधिकांश लोगों में बीमारी का कोई भी संकेत या लक्षण नहीं होता है। यह ट्रेट (विशेषक) सामान्यतः कोई भी स्वास्थ्य समस्याएँ नहीं करता है।
हीमोग्लोबिन D ट्रेट (विशेषक) से ग्रस्त लोगों में हीमोग्लोबिन D बीमारी या हीमोग्लोबिन SD बीमारी नहीं होता है। उनमें जीवन में आगे चलकर ये स्थितियाँ नहीं हो सकती हैं। लेकिन वे इन बीमारियों के जीन अपने बच्चों को दे सकते हैं।
हीमोग्लोबिन D ट्रेट (विशेषक) ऐसे लोगों में अधिक आम है जिनके पूर्वज भारत से आए थे या उन लोगों में जो एशियाई भारतीय विरासत से हैं। लेकिन किसी भी राष्ट्रीयता या वंशावली के व्यक्ति में हीमोग्लोबिन E ट्रेट (विशेषक) होना संभव है।
एक साधारण रक्त परीक्षण आपको बता सकता है कि आपमें हीमोग्लोबिन D ट्रेट (विशेषक) है या नहीं। ये परीक्षण अक्सर नियमित नवजात स्क्रीनिंग के भाग के रूप में किए जाते हैं। यदि आपके परिवार में किसी को हीमोग्लोबिन D ट्रेट (विशेषक) है तो आपका चिकित्सक इस परीक्षण का सुझाव दे सकता है।
हीमोग्लोबिन D ट्रेट (विशेषक) पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता है। आँखों के रंग या बालों के रंग की तरह, हीमोग्लोबिन D ट्रेट (विशेषक) के जीन भी वंशानुगत होते हैं, यानी माता-पिता से बच्चों को मिलते हैं।
हीमोग्लोबिन D ट्रेट (विशेषक) से ग्रस्त माता-पिता की संतान में हीमोग्लोबिन D बीमारी, हीमोग्लोबिन SD बीमारी या हीमोग्लोबिन D/बीटा थैलेसीमिया बीमारी हो सकता है।
बच्चे को यह बीमारी है या नहीं यह बात माता और पिता, दोनों से प्राप्त जीन पर निर्भर करती है। यह समझना महत्वपूर्ण है कि हीमोग्लोबिन C ट्रेट (विशेषक) एक से दूसरी पीढ़ी को कैसे मिलता है और कैसे वह आपके बच्चों और उनके बच्चों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।
यदि माता या पिता में हीमोग्लोबिन D ट्रेट (विशेषक) है और पिता या माता में सामान्य हीमोग्लोबिन है तो:
हर गर्भावस्था के साथ, हीमोग्लोबिन D ट्रेट (विशेषक) से ग्रस्त संतान होने की 50% (2 में से 1) की संभावना होती है।
हर गर्भावस्था के संभावित परिणाम इस प्रकार हैं:
यदि माता और पिता, दोनों में हीमोग्लोबिन D ट्रेट (विशेषक) है तो:
हर गर्भावस्था के साथ, हीमोग्लोबिन D बीमारी से ग्रस्त संतान होने की 25% (4 में से 1) की संभावना होती है।
हर गर्भावस्था के संभावित परिणाम इस प्रकार हैं:
यदि माता या पिता में हीमोग्लोबिन D ट्रेट (विशेषक) है और पिता या माता में सिकल सेल ट्रेट है तो:
हर गर्भावस्था के साथ, हीमोग्लोबिन SD बीमारी, जो एक प्रकार का सिकल सेल बीमारी है, से ग्रस्त संतान होने की 25% (4 में से 1) की संभावना होती है।
हीमोग्लोबिन SD बीमारी से ग्रस्त लोगों की लाल रक्त कोशिकाओं में हीमोग्लोबिन S और हीमोग्लोबिन D, दोनों होते हैं। हीमोग्लोबिन SD बीमारी एक आजीवन चलने वाली बीमारी है जिसके कारण गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ हो सकती हैं। इस बीमारी से ग्रस्त लोगों को चिकित्सीय उपचार की ज़रूरत होती है।
हर गर्भावस्था के संभावित परिणाम इस प्रकार हैं:
यदि माता या पिता में हीमोग्लोबिन D ट्रेट (विशेषक) है और पिता या माता में बीटा थैलेसीमिया ट्रेट (विशेषक) है तो:
हर गर्भावस्था के साथ, हीमोग्लोबिन D/बीटा ज़ीरो थैलेसीमिया (Dβ0) बीमारी से ग्रस्त संतान होने की 25% (4 में से 1) की संभावना होती है। हीमोग्लोबिन Dβ0 बीमारी एक आजीवन चलने वाली बीमारी है जिसके कारण गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ हो सकती हैं।
हर गर्भावस्था के संभावित परिणाम इस प्रकार हैं:
हीमोग्लोबिन D ट्रेट (विशेषक) के बारे में और जानने के लिए अपने चिकित्सक या आनुवांशिक परामर्शदाता से बात करें। आपकी देखभाल टीम आपकी और आपके बच्चे की ट्रेट (विशेषक) स्थिति के बारे में और विवरण दे सकती है।
—
समीक्षित: दिसंबर 2023