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दिन में अत्यधिक नींद आना, हाइपरसोम्निया (अधिक नींद), और नारकोलेप्सी

दिन में अत्यधिक नींद आना क्या है?

दिन में अत्यधिक नींद या ईडीएस, ऐसी परिस्थिति है, जिसके परिणामस्वरुप दिन में व्यक्ति को बहुत नींद महसूस होती है। शायद कोई व्यक्ति रात में अधिक समय तक सोए, दिन के दौरान झपकी ले, या स्कूल में या काम के दौरान असामान्य या अनुचित समय पर सो जाए। ईडीएस वाले कुछ लोगों को ‘हल्की नींद’ आ सकती है, इसमें वे बहुत थोड़े समय में सो जाते हैं और उन्हें पता भी नहीं चलता कि वे सो चुके हैं। हल्की नींद के बाद, वे महसूस कर सकते हैं जैसे कि वे गहरी नींद में सो गए हों या थोड़े समय के लिए ध्यान देना बंद कर दिया था।

थकान या थकावट की तरह, ईडीएस अतिरिक्त नींद से दूर नहीं जाता है। हालांकि, अतिरिक्त नींद और स्वस्थ नींद की आदतों से फुर्ती बेहतर हो सकती है और रोजाना के काम में सुधार हो सकता है।

हाइपरसोम्निया (अधिक नींद) और नारकोलेप्सी, नींद से जुड़े विकार हैं जिनके कारण दिन में अत्यधिक नींद आती है। दूसरे स्वस्थ बच्चों की तुलना में कैंसर से पीड़ित बच्चों और किशोरों में हाइपरसोम्निया (अधिक नींद) या नारकोलेप्सी होने की संभावना अधिक होती है। कुछ प्रकार के दिमाग के कैंसर वाले बच्चों में ये विकार सबसे सामान्य होते हैं।

हाइपरसोम्निया (अधिक नींद) के बारे में और पढ़ें नारकोलेप्सी के बारे में और पढ़ें

एक परीक्षण, जिसे मल्टीपल स्लीप लेटेंसी टेस्ट (MLST) कहते हैं, का उपयोग यह जानने के लिए किया जा सकता है कि क्या बच्चे को हाइपरसोम्निया या नारकोलेप्सी है।

इसके अलावा स्वस्थ्य नींद आदतें और संभालने की कला, उपचार में दिन के दौरान ध्यान और सतर्कता बढ़ाने के लिए दवाई शामिल हो सकती है।

हाइपरसोम्निया (अधिक नींद) या नारकोलेप्सी से पीड़ित बच्चे या किशोर को सीखने और एकाग्रता में मदद करने के लिए स्कूल में विशेष सामंजस्य की आवश्यकता हो सकती है। स्कूल में नियत झपकी, देरी से शुरू होने का समय, स्कूल का छोटा दिन, या होमवर्क में अतिरिक्त समय देना या टेस्ट्स, अकादमिक प्रदर्शन में मदद कर सकते हैं।

हाइपरसोम्निया (अधिक नींद) क्या है?

हाइपरसोम्निया (अधिक नींद), नींद का एक विकार है जिसके कारण व्यक्ति को दिन में बहुत नींद आती है। इसे दिन में अत्यधिक नींद आना या ईडीएस कहा जाता है। हाइपरसोम्निया (अधिक नींद) से पीड़ित व्यक्ति को सतत नींद की ज़रूरत महसूस होती है और शायद ही कभी पूरी तरह से उसे आराम महसूस हो पाता है। इस विकार के कारण व्यक्ति को सामान्य से ज्यादा जल्दी नींद आ जाती है और रोजाना के कामों में समस्या होती है।

नींद के अध्ययन का इस्तेमाल यह आंकलन करने के लिए किया जाता है कि कहीं दिन के समय में अत्यधिक नींद, हाइपरसोम्निया (अधिक नींद) या नार्कोलेप्सी के कारण तो नहीं आती है। नारकोलेप्सी की पहचान तब होती है यदि व्यक्ति नींद की REM स्टेज (अवस्था) अवस्था में सामान्य से अधिक तेज़ी से प्रवेश कर जाता है।

हाइपरसोम्निया (अधिक नींद) के लक्षण

हाइपरसोम्निया (अधिक नींद) के लक्षण में शामिल है:

  • दिन के दौरान बहुत अधिक नींद आना (दिन में अधिक नींद आना)
  • उठने या जागते रहने में परेशानी होना
  • जागने के बाद मदहोश या उलझन महसूस करना
  • रात में अधिक देर तक सोना या दिन में अधिक झपकी लेना
  • नींद के बाद भी तरोताज़ा महसूस न होना
  • सोचने या ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई (“ब्रेन फॉग”)
  • कम ऊर्जावान या सुस्ती महसूस करना
  • काम करने या स्कूल/काम में दूसरों के साथ तालमेल बनाए रखने में समस्या होना

हाइपरसोम्निया (अधिक नींद) के कारण

कई प्रकार के कारक नींद से जागने के चक्र को प्रभावित कर सकते हैं और हाइपरसोम्निया (अधिक नींद) की समस्या पैदा कर सकते हैं। इनमें शामिल है:

  • ट्यूमर, स्ट्रोक, सर्जरी, रेडिएशन या सिर की चोट के प्रभाव से होने वाली दिमाग की चोट
  • कॉर्टिकोस्टेरॉयड या दर्द की दवाएं जैसी दवाइयां
  • हार्मोन बदलाव
  • अवसाद या चिंता
  • शराब या दवा का दुरुपयोग
  • नींद की खराब आदतें और अनिद्रा या स्लीप एपनिया जैसे नींद संबंधी विकार अनींद या नींद संबंधी अश्वसन

कुछ प्रकार के दिमाग के ट्यूमर जैसे क्रेनियोफेरिन्जयोमाा से पीड़ित बच्चों में हाइपरसोम्निया (अधिक नींद) होने का खतरा अधिक होता है। ये ट्यूमर इसके पास विकसित होते हैं हाइपोथेलेमस, जो दिमाग की एक ऐसी संरचना है जो नींद के नियंत्रण में मदद करती है, के पास विकसित होते हैं।

कभी-कभी हाइपरसोम्निया (अधिक नींद) एक ज्ञात कारण के बिना विकसित हो सकती है, यह एक ऐसी स्थिति होती है जिसे इडियोपैथिक हाइपरसोम्निया (अधिक नींद) कहा जाता है।

हाइपरसोम्निया (अधिक नींद) रोग की पहचान करना

चिकित्सक, चिकित्सा इतिहास देखेगा और शारीरिक परीक्षा करेगा। रक्त कोशिकाओं की संख्या, हार्मोन और अंग के काम करने में बदलाव की जांच करने के लिए खून की जांच की जा सकती है। दवाइयों की समीक्षा यह निर्धारित करने में मदद कर सकती है कि मरीज जिन दवाओं को ले रहा है, उनके दुष्प्रभाव के कारण नींद आती है।

नींद और नींद के पैटर्न के लिए विशेष जांच में निम्न शामिल हो सकते हैं:

  • लक्षणों को जानने के लिए मरीज और परिवार से बातचीत या उनसे सवाल पूछना
  • दिन और रात की नींद को ट्रैक करने के लिए स्लीप डायरी रखना
  • रात में नींद के दौरान दिमाग, मांसपेशियों, हृदय गति और साँस लेने की गतिविधि को मापने के लिए नींद का अध्ययन (पॉलीसोम्नोग्राफी)
  • मल्टीपल स्लीप लेटेंसी टेस्ट (MSLT) यह मापने के लिए होता है कि मरीज को नींद आने में कितना समय लगता है

हाइपरसोम्निया (अधिक नींद) का उपचार

हाइपरसोम्निया (अधिक नींद) के लिए जीवनशैली में परिवर्तन

दिन के दौरान नियत समय पर झपकी और शारीरिक गतिविधि सतर्कता बढ़ाने में मदद कर सकती हैं। यदि सतर्कता से जुड़ी चिंताएं हैं, तो मरीजों को बाइक चलाने, ड्राइविंग करने, खाना पकाने या तैराकी करने जैसी गतिविधियां नहीं करनी चाहिए क्योंकि ये खतरनाक साबित हो सकती हैं। संज्ञानात्मक व्यवहार-संबंधी थेरेपी (कॉग्निटिव बिहेवरल थेरेपी) , CBT) मरीजों और परिवारों की सोने की आदतों को सुधारने और हाइपरसोम्निया (अधिक नींद) के प्रभावों से निपटने के लिए कौशल सीखने में मदद करती है। 

हाइपरसोम्निया (अधिक नींद) के लिए दवाई

ध्यान और सतर्कता बढ़ाने के लिए चिकित्सक उत्तेजक दवाई जैसे कि मोडाफिनिल (Provigil® (प्रोविजिल)) या मेथिलफिनेट (Ritalin® (रिटालिन)) लेने की सलाह दे सकते हैं। मरीजों को दवा चिकित्सक के बताए अनुसार लेनी चाहिए और दवा की खुराक या दवा लेने के समय में कोई बदलाव करने से पहले अपने चिकित्सक या फार्मासिस्ट से बात करनी चाहिए।

हाइपरसोम्निया (अधिक नींद) के लिए स्कूल में समायोजन

हाइपरसोम्निया (अधिक नींद) से पीड़ित बच्चे या किशोर को स्कूल में विशेष समायोजन की ज़रूरत होती है। परिवारों को स्कूलों के साथ मिलकर 504 प्लान बनाना चाहिए। सामंजस्य के उदाहरणों में स्कूल में नियत (तय की गई) झपकी, देरी से शुरू होने का समय, स्कूल का दिन छोटा होना या होमवर्क या टेस्ट्स में अतिरिक्त समय देना शामिल होता है।

स्वस्थ नींद के लिए सुझाव

  • जानें कि आपको कितनी नींद की ज़रूरत है। वयस्कों की तुलना में बच्चों और किशोरों को अधिक नींद की आवश्यकता होती है, और कैंसर पीड़ितों को और भी अधिक नींद की आवश्यकता हो सकती है। अपने चिकित्सक से प्रतिदिन के लिए अनुशंसित नींद के घंटों के बारे में बात करें, जिसमें झपकी और रात की नींद शामिल है।
  • आरामदायक नींद का वातावरण बनाएं। सिर्फ सोने के लिए शांत, सहज और आरामदायक जगह तैयार करें। रात के दौरान प्रकाश और शोर को कम करने के लिए कुछ करें।
  • विशेषकर रात में, कैफीन और निकोटीन के सेवन से बचें। शाम 4 बजे के बाद या सोने जाने के समय से पहले के 6 घंटों के भीतर कैफ़ीन-युक्त खाद्य व पेय पदार्थों से बचें।
  • व्यायाम। दिन के दौरान शारीरिक गतिविधि रात की नींद में सुधार कर सकती है। सोने के समय से पहले भारी व्यायाम करने से बचें।
  • बाहर समय बिताएं। दिन में धूप या हल्की रोशनी में बाहर निकलने से शरीर के सोने-जागने के चक्र को नियमित रखने में मदद मिलती है।
  • आराम से सोने की दिनचर्या बनाएं। टीवी और सभी इलेक्ट्रानिक उपकरणों को बंद करना न भूलें। खुद को सुकून देने वाली कार्यनीतियों पर बच्चों के साथ काम करें।

नींद की स्वस्थ आदतों के बारे में और जानें

 

हाइपरसोम्निया (अधिक नींद) के बारे में अधिक जानकारी के लिए संसाधन

नींद की बीमारी क्या है?

नार्कोलेप्सी (नींद की बीमारी) एक न्यूरोलॉजिकल विकार है जो नींद-जागने के चक्र को बाधित करता है और दिन के समय अत्यधिक नींद आने का कारण बनता है। दिन के दौरान व्यक्ति बहुत अधिक नींद महसूस कर सकता है (दिन में अधिक नींद आना) और जागते रहने में परेशानी होती है। भारी नींद का "स्लीप अटैक" अचानक आ सकता है। नींद की बीमारी से पीड़ित कुछ लोग असामान्य समय या स्थानों पर सो जाते हैं। नींद की बीमारी के कारण रात के दौरान नींद में बाधा हो सकती है या बार-बार आँख खुल जाती हैं। हाइपरसोम्निया ग्रस्त व्यक्ति में नारकोलेप्सी की पहचान तब होती है यदि व्यक्ति रात में, और दिन के दौरान झपकियाँ लेते समय, नींद की REM स्टेज (अवस्था) में सामान्य से अधिक तेज़ी से प्रवेश कर जाता है।

नींद की बीमारी के लक्षण

नींद की बीमारी के लक्षण में शामिल हैं:

  • दिन के दौरान बहुत अधिक नींद आना (दिन में अत्यधिक नींद आना)
  • असामान्य समय पर या असामान्य स्थानों पर अचानक अत्यधिक नींद आ जाना या सो जाना (नींद का अटैक)।
  • अचानक मांसपेशियों में कमजोरी होना या हिलने में असमर्थ होना (कैटैप्लेक्सी); यह दिमाग के कैंसर के कारण होने वाले नींद की बीमारी में कम सामान्य होता है
  • रात में बार-बार जागना या नींद में विघटन पड़ना
  • सोते समय या जागते समय (नींद का पैरालिसिस) चलने या बोलने में असमर्थ होने का अनुभव करना
  • रात में सोते समय मतिभ्रम का अनुभव करना (नींदजनक मतिभ्रम)
  • स्कूल या काम करने में समस्या आना

नींद की बीमारी का कारण

नींद की बीमारी के कारणों को पूरी तरह से नहीं समझा गया है। नार्कोलेप्सी कभी-कभी परिवारों में हो सकती है, लेकिन अक्सर बिना किसी ज्ञात कारण के विकसित होती है।

हाइपोथैलेमस को नुकसान हाइपोथेलेमस, जो नींद को नियंत्रित करने में मदद करने वाली मस्तिष्क संरचना है, को नुकसान नार्कोलेप्सी के जोखिम को बढ़ा सकता है। कुछ प्रकार के नींद की बीमारी में न्यूरोट्रांसमीटर हाइपोकरेटिन में परिवर्तन शामिल है, जो हाइपोथैलेमस में उत्पादित एक रासायनिक संकेत होता है।

क्रेनियोफेरिन्जयोमा नाम के दिमाग के कैंसर से पीड़ित बच्चों में नींद की बीमारी का खतरा अधिक होता है। ये ट्यूमर हाइपोथैलेमस के पास विकसित होते हैं, ट्यूमर के प्रभाव के कारण नींद की बीमारी हो सकता है या ट्यूमर हटाने के बाद सर्जरी करने के कारण विकसित हो सकता है।

नींद की बीमारी की पहचान करना

चिकित्सक, चिकित्सा इतिहास देखेगा और शारीरिक परीक्षा करेगा। रक्त कोशिकाओं की संख्या, हार्मोन और अंग के काम करने में बदलाव की जांच करने के लिए खून की जांच की जा सकती है। दवाइयों की समीक्षा यह निर्धारित करने में मदद कर सकती है कि मरीज जिन दवाओं को ले रहा है, उनके दुष्प्रभाव के कारण नींद आती है।

मस्तिष्क-मेरु द्रव में हाइपोकरेटिन (जिसे ऑरेक्सिन भी कहा जाता है) की मात्रा को मापने के लिए लंबर पंचर का इस्तेमाल किया जा सकता है सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड। हाइपोकरेटिन का निम्न स्तर एक प्रकार के नींद की बीमारी का संकेत दे सकता है।

नींद और नींद के पैटर्न के लिए विशेष जांच में निम्न शामिल हो सकते हैं:

  • लक्षणों को जानने के लिए मरीज और परिवार से बातचीत करना
  • दिन और रात की नींद को ट्रैक करने के लिए स्लीप डायरी रखना
  • रात में नींद के दौरान दिमाग, मांसपेशियों, हृदय गति और साँस लेने की गतिविधि को मापने के लिए नींद का अध्ययन (पॉलीसोम्नोग्राफी)
  • मल्टीपल स्लीप लेटेंसी टेस्ट (MSLT) यह मापने के लिए होता है कि मरीज को नींद आने में कितना समय लगता है

नींद की बीमारी में मरीज जल्दी सो जाते हैं और आरईएम नींद में पहुंच जाते हैं, जो सामान्य नींद चक्र का एक विशिष्ट हिस्सा होता है। बगैर नींद की समस्या के लोगों को आरईएम नींद में जाने में अधिक समय लगता है और दिन में झपकी के दौरान आरईएम नींद में पहुंचने की संभावना कम होती है।

नींद की बीमारी का उपचार

नींद की बीमारी के लिए जीवनशैली में परिवर्तन

दिन के दौरान नियत समय पर झपकी और शारीरिक गतिविधि सतर्कता बढ़ाने में मदद कर सकती हैं। यदि सतर्कता से जुड़ी चिंताएं हैं, तो मरीजों को बाइक चलाने, ड्राइविंग करने, खाना पकाने या तैराकी करने जैसी गतिविधियां नहीं करनी चाहिए क्योंकि ये खतरनाक साबित हो सकती हैं। संज्ञानात्मक व्यवहार-संबंधी थेरेपी (कॉग्निटिव बिहेवरल थेरेपी) (सीबीटी) रोगियों और परिवारों को नींद की आदतों को सुधारने और नींद की बीमारी के प्रभावों से निपटने के लिए कौशल सीखने में मदद कर सकती है।

नींद की बीमारी के लिए दवाई

ध्यान और सतर्कता बढ़ाने के लिए चिकित्सक उत्तेजक दवाई जैसे कि मोडाफिनिल (प्रोविजिल®) या मेथिलफिनेट (रिटालिन®) लेने की सलाह दे सकते हैं। सोडियम ऑक्सीबेट (XYREM® (ज़ाईरेम) एक अन्य प्रकार की दवा है, जिसका इस्तेमाल नींद की बीमारी के उपचार के लिए किया जा सकता है। मरीजों को दवा चिकित्सक के बताए अनुसार लेनी चाहिए और दवा की खुराक या दवा लेने के समय में कोई बदलाव करने से पहले अपने चिकित्सक या फार्मासिस्ट से बात करनी चाहिए।

नींद की बीमारी के लिए स्कूल में सामंजस्य

नींद की बीमारी से पीड़ित बच्चे या किशोर को स्कूल में विशेष सामंजस्य की ज़रूरत होती है। परिवारों को स्कूलों के साथ मिलकर 504 प्लान बनाना चाहिए। सामंजस्य के उदाहरणों में स्कूल में नियत (तय की गई) झपकी, देरी से शुरू होने का समय, स्कूल का दिन छोटा होना या होमवर्क या टेस्ट्स में अतिरिक्त समय देना शामिल होता है।

स्वस्थ नींद के लिए सुझाव

  • जानें कि आपको कितनी नींद की ज़रूरत है। वयस्कों की तुलना में बच्चों और किशोरों को अधिक नींद की आवश्यकता होती है, और कैंसर पीड़ितों को और भी अधिक नींद की आवश्यकता हो सकती है। अपने चिकित्सक से प्रतिदिन के लिए अनुशंसित नींद के घंटों के बारे में बात करें, जिसमें झपकी और रात की नींद शामिल है।
  • आरामदायक नींद का वातावरण बनाएं। सिर्फ सोने के लिए शांत, सहज और आरामदायक जगह तैयार करें। रात के दौरान प्रकाश और शोर को कम करने के लिए कुछ करें।
  • विशेषकर रात में, कैफीन और निकोटीन के सेवन से बचें। शाम 4 बजे के बाद या सोने जाने के समय से पहले के 6 घंटों के भीतर कैफ़ीन-युक्त खाद्य व पेय पदार्थों से बचें।
  • व्यायाम। दिन के दौरान शारीरिक गतिविधि रात की नींद में सुधार कर सकती है। सोने के समय से पहले भारी व्यायाम करने से बचें।
  • बाहर समय बिताएं। दिन में धूप या हल्की रोशनी में बाहर निकलने से शरीर के सोने-जागने के चक्र को नियमित रखने में मदद मिलती है।
  • आराम से सोने की दिनचर्या बनाएं। टीवी और सभी इलेक्ट्रानिक उपकरणों को बंद करना न भूलें। खुद को सुकून देने वाली कार्यनीतियों पर बच्चों के साथ काम करें।

नींद की स्वस्थ आदतों के बारे में और जानें

 

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समीक्षित: जून 2019