बहरापन बचपन में होने वाले कैंसर या कैंसर के उपचारों का संभावित दुष्प्रभाव है। कुछ कैंसर दवाइयां और रेडिएशन और सर्जरी सहित अन्य उपचार, कान को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप बहरापन हो सकता है। कुछ मामलों में, ट्यूमर के कारण ही बहरापन हो सकता है।
जिन बच्चों को ओटोटॉक्सिक थेरेपी (जिन उपचारों को कान के नुकसान के लिए जाना जाता है) मिलती है, उन्हें समस्याओं को देखने के लिए नियमित रूप से सुनने की शक्ति की जांच करवानी चाहिए। बहरापन, बातचीत करने की शक्ति, सामाजिक संबंधों, सीखने के कौशल, शैक्षणिक उपलब्धि और कैरियर के लक्ष्यों को प्रभावित कर सकता है। कैंसर के बाद जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए शुरुआती मूल्यांकन और हस्तक्षेप से मरीजों और परिवारों को बहरेपन की समस्या से अच्छी तरह निपटने में मदद मिल सकती है।
कुछ मामलों में, देखभाल टीम बहरेपन के आधार पर दवाइयां या अन्य उपचारों में बदलाव का सुझाव दे सकती है।
जिन बच्चों को ऐसे उपचार दिए जाते हैं, जिनसे कान को नुकसान पहुंचता है, उन्हें समस्याओं को देखने के लिए नियमित रूप से सुनने की शक्ति की जांच करवानी चाहिए।
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बचपन में होने वाले कैंसर के मरीजों में बहरेपन के जोखिम कारकों में ये शामिल हैं:
कम उम्र में उपचार प्राप्त करने और/या कीमोथेरेपी या रेडिएशन की अधिक तेज़ खुराक से भी बहरेपन की संभावना बढ़ जाती है।
ओटोटॉक्सिक दवाएं, ड्रग्स कान को नुकसान पहुंचा सकती हैं, इसके परिणामस्वरूप बहरापन हो सकता है। ट्यूमर के प्रभाव से भी बहरापन हो सकता है। नियमित रूप से सुनने की शक्ति की जांच से किसी भी विकासशील समस्याओं की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
कान के तीन मुख्य भाग होते हैं:
बचपन में होने वाले कैंसर के मरीजों और कैंसर से बचे लोगों में बहरेपन के विभिन्न प्रकार को देखा जा सकता है। कीमोथेरेपी के कारण सुनने की समस्याएं दोनों कानों को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, सर्जरी या रेडिएशन के बाद बहरापन एक या दोनों कानों में हो सकता है, यह विशिष्ट प्रकार की क्षति पर निर्भर करता है। कुछ मरीजों के लिए, समय के साथ सुनने की शक्ति में सुधार हो सकता है। कई मरीजों में बहरापन अक्सर स्थायी होता है और शायद उम्र के साथ स्थिति खराब हो सकती है। कुछ ठीक हुए लोगों को उपचार समाप्त होने के महीनों या वर्षों बाद सुनने की समस्याएं शुरू हो सकती हैं। इन समस्याओं को देर से दिखाई देने वाले प्रभाव के रूप में जाना जाता है। बहरेपन के प्रकार को समझना, देखभाल और निगरानी की योजना बनाने में मदद के लिए महत्वपूर्ण होता है।
प्रवाहकीय बधिरता
जब बाहरी या मध्य कान में रुकावट या क्षति होती है, तो इस प्रकार का बहरापन होता है। तरल पदार्थ, मोम या सूजन ध्वनि को सामान्य ढंग से आगे बढ़ने से रोक सकते हैं, जिसके कारण ध्वनियाँ “मंद” लग सकती हैं। यह भी संभव है कि कान का पर्दा या मध्य कर्ण की हड्डियाँ सख्त या क्षतिग्रस्त हो गई हों। संक्रमण, प्रवाहकीय बधिरता का एक सामान्य कारण हो सकता है। विकीरण चिकित्सा से एक या दोनों कानों में प्रवाहकीय बधिरता हो सकती है।
संवेदी स्नायविक बधिरता
संवेदी स्नायविक बधिरता आंतरिक कान की रोम कोशिकाओं (संवेदी) को या श्रवण तंत्रिका अथवा मस्तिष्क (तंत्रिकीय) को होने वाली क्षति के परिणामस्वरूप होती है।
बचपन में होने वाले कैंसर के मरीजों में बहरापन प्रवाहकीय, संवेदी स्नायविक या दोनों हो सकता है। प्रवाहकीय बधिरता समय के साथ सुधर सकती है, यदि समस्या का कारण, जैसे द्रव या सूजन को हटा दिया जाए। संवेदी स्नायविक बधिरता स्थायी रहने की संभावना होती है, विशेषकर अगर कीमोथेरेपी या रेडिएशन से लोम कोशिकाएं या नसें क्षतिग्रस्त हो गई हों।
बहरेपन के जोखिम वाले मरीजों में सुनने की शक्ति की जांच किसी ऑडियोलॉजिस्टसामान्य प्रकार के सुनने की शक्ति की जांच का ऑडियोलॉजिकल मूल्यांकन होता है, इसमें मरीज ईयरफ़ोन के माध्यम से विभिन्न ध्वनियों को सुनता है। प्रत्येक कान में कौन-सी आवाज और पिच सुनाई पड़ता है, ऑडियोलॉजिस्ट उसे रिकॉर्ड करता है। सुनने के टेस्ट में परिणामों को दर्ज किया जाता है और उसकी तुलना सामान्य सुनने की शक्ति के अपेक्षित स्तरों से की जाती है। इस जांच का इस्तेमाल समय के साथ सुनने की शक्ति को मॉनिटर करने के लिए भी किया जाता है। ध्वनि की प्रतिक्रिया में दिमाग के तरंगों की निगरानी करके भी सुनने की शक्ति की जांच की जा सकती है। इस जांच को सुनने से संबंधित ऑडिटरी ब्रेनस्टेम रिस्पॉन्स (एबीआर) कहा जाता है। जोखिम कारकों और बहरेपन के लक्षणों के आधार पर ऑडियोलॉजिस्ट आगे की जांच और मॉनिटरिंग की सलाह देगा।
सुनने की शक्ति के विकार में मदद करने के लिए विभिन्न प्रकार की सेवाएं और सहायक उपकरण उपलब्ध हैं। इनमें शामिल है:
एक ऑडियोलॉजिस्ट मरीजों को उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप सबसे अच्छी सेवाओं और उपकरणों को प्रदान करने में उनकी मदद कर सकता है। यह महत्वपूर्ण है कि माता-पिता यह सुनिश्चित करें कि बच्चे अपने श्रवण उपकरणों का ठीक से उपयोग करें और सुनने की शक्ति को मॉनिटर करने के लिए फालो-अप अपॉइंटमेंट लें। बहरापन स्कूल, काम और रिश्तों सहित विभिन्न क्षेत्रों में समस्याओं से जुड़ा हुआ है। हालाँकि, श्रवण यंत्रों को पहनने और या अन्य उपकरणों और उपलब्ध सेवाओं (जैसे इंडिविजुअल एज्यूकेशन प्लान्स -आईईपी) का इस्तेमाल करके बच्चों को कैंसर के बाद जीवन में सफलता का सबसे अच्छा मौका दे सकते हैं।
नियमित रूप से सुनने की शक्ति की जांच से किसी भी विकासशील समस्याओं की पहचान करने में मदद मिल सकती है। एक ऑडियोलॉजिकल मूल्यांकन श्रवण परीक्षण का एक सामान्य प्रकार है जिसमें रोगी इयरफ़ोन के माध्यम से विभिन्न ध्वनियाँ सुनता है।
अपने जोखिम को जानें। अपनी देखभाल टीम से कैंसर के उपचारों (प्राप्त खुराक सहित) और बहरेपन के अन्य कारकों के बारे में बात करें।
जांच करवाएं और लक्षणों पर नज़र रखें। बेसलाइन सुनने की शक्ति की जांच करें और सुनने की शक्ति में परिवर्तनों को जल्दी पकड़ने के लिए नियमित रूप से निगरानी करें। बहरेपन के लक्षण आसानी से अनदेखे किए जा सकते हैं। इस बात से अवगत रहें कि किन बातों पर ध्यान देना है और किसी भी चिंता के बारे में अपने चिकित्सक या ऑडियोलॉजिस्ट को बताएं।
सुनने में मदद करने वाले सहायक उपकरण और सेवाओं का इस्तेमाल करें। बहरेपन के नुकसान के कुछ नकारात्मक प्रभावों को उचित उपकरणों और सेवाओं का इस्तेमाल करके रोका जा सकता है। सुनिश्चित करें कि आप नियमित रूप से ऑडियोलॉजिस्ट से मिलें और सलाह का पालन करें।
अपने सुनने की शक्ति को सुरक्षित रखें। प्रतिदिन का शोर आंतरिक कान की लोम कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। तेज़ आवाज़ से सुनने की शक्ति को जल्दी नुकसान पहुंच सकता है और समय के साथ-साथ कम आवाज़ में भी नुकसान पहुंच सकता है। संगीत, ट्रैफ़िक, स्पोर्टिंग इवेंट्स और लॉनमूवर्स या कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट जैसे तेज़ आवाज़ वाले संसाधनों के संपर्क में आने का ध्यान रखें।
बहरेपन के जोखिम के बारे में आपके चिकित्सक से बात करने में मदद करने के लिए यहां पर एक त्वरित सूची दी गई है। जिन बच्चों को सिस्प्लेटिन, कार्बोप्लैटिन या सिर या गर्दन को रेडिएशन प्राप्त होता है, उन्हें उपचार पूरा होने के बाद सलाह के अनुसार फॉलो अप जांच के साथ कम से कम एक बार सुनने की शक्ति की जांच करवानी चाहिए।
| ✔ | जोखिम कारक |
|---|---|
| मेरे बच्चे को सिस्प्लेटिन या कार्बोप्लैटिन कीमोथेरेपी मिली है। | |
| मेरे बच्चे को सिर या गर्दन पर विकीरण चिकित्सा दी गई है। | |
| मेरे बच्चे को एमिनोग्लाइकोसाइड एंटीबायोटिक्स (एमिकासिन, जेंटामाइसिन, टोबैमाइसिन) या एरिथ्रोमाइसिन मिला है। | |
| मेरे बच्चे को कुछ मूत्रवर्धक जैसे कि फ़्यूरोसेमाइड या एथाक्रिनिक एसिड मिला है। | |
| मेरे बच्चे की उम्र 4 चार साल से कम थी, जब कैंसर का उपचार शुरू हुआ था। | |
| मेरे बच्चे में अन्य जोखिम भरे कारक भी हैं, जैसे कि समय से पहले जन्म होना, जन्म के समय कम वजन, पहले से ही सुनने की समस्याएं, बार-बार कान में संक्रमण, मैनिंजाइटिस, स्कार्लेट बुखार (लाल बुखार) या गुर्दे का खराब कार्य। |
बचपन के कैंसर से बचे वे लोग जिनमें बहरेपन के जोखिम कारक हैं, उन्हें अपने प्राथमिक चिकित्सक के पास वार्षिक जांच करानी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सुनने की जांच नियमित फॉलो-अप देखभाल का हिस्सा हो।
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समीक्षित: अगस्त 2018
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