रक्त का थक्का रक्त का एक जैल-जैसा पिंड होता है जो रक्त कोशिकाओं और प्रोटीन के साथ चिपककर बने पिंड से बनता है। रक्त पूरे शरीर में धमनियों और शिराओं नामक वाहिकों में बहता रहता है। यदि कोई चोट लगती है, जैसे कट या घाव, तो उस स्थान पर रक्तस्राव रोकने के लिए एक थक्का बन जाता है।
कभी-कभी रक्त का थक्का (थ्रॉम्बस) किसी रक्त वाहिका के भीतर वहाँ बन जाता है जहाँ उसकी ज़रूरत नहीं होती है और फिर वह रक्त का प्रवाह अवरुद्ध कर देता है। इसे थ्रॉम्बोसिस कहते हैं। थक्का अपनी जगह से टूटकर फेफड़ों या दिमाग में भी जा सकता है (एम्बोलिज़्म)।
रक्त के थक्के गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ कर सकते हैं, जो प्राणघातक हो सकती हैं।
यदि किसी रक्त वाहिका में रक्त का थक्का बने और फिर वह टूटकर अपनी जगह से अलग होकर शरीर के किसी अन्य भाग में पहुँच जाए तो वह हानिकारक हो सकता है।
रक्त के थक्के के संकेत और लक्षण उसके स्थान पर निर्भर करते हैं।
डीप वेन थ्रॉम्बोसिस या DVT: यदि रक्त का थक्का किसी मांसपेशी, आम तौर पर किसी पैर या बाँह की मांसपेशी, के भीतर गहराई में है तो संकेतों और लक्षणों में ये शामिल हो सकते हैं:
फेफड़ा संबंधी एम्बोलिज़्म: यदि रक्त का थक्का फेफड़ों में पहुँच जाए, तो संकेतों और लक्षणों में ये शामिल हो सकते हैं:
आघात (लकवा) यदि रक्त का थक्का दिमाग में पहुँच जाए, तो संकेतों और लक्षणों में ये शामिल हो सकते हैं:
रक्त का थक्का चिकित्सीय आपातस्थिति होता है। यदि आपके बच्चे में इनमें से कोई भी संकेत या लक्षण हो तो तुरंत चिकित्सीय सहायता प्राप्त करें।
कुछ कारक आपके बच्चे में रक्त के थक्के का जोखिम बढ़ा सकते हैं। इनमें शामिल है:
रक्त के थक्कों की पहचान चिकित्सा इतिहास, शारीरिक परीक्षा, रक्त परीक्षणों और इमेजिंग परीक्षणों की मदद से की जाती है।
रक्त के थक्के का उपचार आपके बच्चे के चिकित्सा इतिहास, रक्त के थक्के के स्थान और उसके कारण पर निर्भर करता है।
एंटीकोएगुलेंट नामक दवाएँ (रक्त पतला करने वाली दवाएँ) रक्त के थक्कों का मुख्य उपचार हैं। कुछ मामलों में, यदि रक्त का थक्का प्राणघातक है तो उसे निकालने के लिए सर्जरी ज़रूरी हो सकती है।
रक्त के थक्के की निगरानी के लिए आपके बच्चे को अतिरिक्त इमेजिंग परीक्षणों की ज़रूरत हो सकती है।
पोस्ट-थ्रॉम्बोटिक सिंड्रोम (PTS) डीप वेन थ्रॉम्बोसिस के बाद हो सकने वाली एक संभावित रूप से दीर्घकालिक जटिलता है। यदि रक्त वाहिका को नुकसान हुआ है, तो आपके बच्चे के प्रभावित पैर या बाँह में दर्द और सूजन हो सकते हैं।
पोस्ट-थ्रॉम्बोटिक सिंड्रोम के संकेतों और लक्षणों में ये शामिल हो सकते हैं:
गंभीर रूप में, पोस्ट-थ्रॉम्बोटिक सिंड्रोम से त्वचा पर घाव या छाले हो सकते हैं। उनका ठीक होना मुश्किल हो सकता है।
ये संकेत और लक्षण थ्रॉम्बोसिस के संकेतों और लक्षणों जैसे भी हो सकते हैं। यदि लक्षण बने रहें, बदतर हो जाएँ या यदि आप कारण को लेकर अनिश्चित हों तो चिकित्सीय देखभाल प्राप्त करें।
पोस्ट-थ्रॉम्बोटिक सिंड्रोम के प्रबंधन में मदद के तरीकों में ये शामिल हैं:
अपने बच्चे के रक्त के थक्कों के जोखिम के बारे में और किन संकेतों व लक्षणों पर नज़र रखनी है इस बारे में अपनी देखभाल टीम से बात करें। रक्त के थक्कों की रोकथाम और प्रबंधन के लिए अपनी देखभाल टीम से मिले निर्देशों का हमेशा पालन करें।
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समीक्षित: दिसंबर 2024
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